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bhagavat 10.86.34: आप यदुवंश में प्रकट हुए और तीनों लोकों के समस्त पापों को दूर करने वाले अपने यश का विस्तार करके जन्म-मृत्यु के चक्र में फंसे हुए जीवों का उद्धार करने के लिए ही अवतरित हुए हैं।   |   bhagavat अध्याय 10.86: अर्जुन द्वारा सुभद्रा-हरण तथा कृष्ण द्वारा अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया जाना   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 86: अर्जुन द्वारा सुभद्रा-हरण तथा कृष्ण द्वारा अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया जाना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  10.86.34 
योऽवतीर्य यदोर्वंशे नृणां संसरतामिह ।
यशो वितेने तच्छान्त्यै त्रैलोक्यवृजिनापहम् ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
आप यदुवंश में प्रकट हुए और तीनों लोकों के समस्त पापों को दूर करने वाले अपने यश का विस्तार करके जन्म-मृत्यु के चक्र में फंसे हुए जीवों का उद्धार करने के लिए ही अवतरित हुए हैं।
 
By appearing in the Yadu dynasty, you spread your fame as capable of removing all the sins of the three worlds, only to save those who are trapped in the cycle of birth and death.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)