वाचा मधुरया प्रीणन्निदमाहान्नतर्पितान् ।
पादावङ्कगतौ विष्णो: संस्पृशञ्छनकैर्मुदा ॥ ३० ॥
अनुवाद
जब वे जी-भर के भोजन कर चुके, तो राजा को उन्हें और प्रसन्न करने के लिए, भगवान् विष्णु के चरणों को अपनी गोद में रखकर और उन्हें सुखपूर्वक दबाते हुए, धीरे-धीरे और मृदुल वाणी में बोलना प्रारम्भ किया।
When they had eaten to their fill, the King, to please them further, placed Lord Viṣṇu's feet in his lap and pressed them pleasantly, and spoke slowly and in a soft voice.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥