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bhagavat 10.86.25: ठीक उसी समय, मैथिलराज और श्रुतदेव दोनों हाथ जोड़कर आगे बढ़े और दशरथ के स्वामी को ब्राह्मण मुनियों सहित अपने अतिथि बनने के लिए आमंत्रित किया।   |   bhagavat अध्याय 10.86: अर्जुन द्वारा सुभद्रा-हरण तथा कृष्ण द्वारा अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया जाना   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 86: अर्जुन द्वारा सुभद्रा-हरण तथा कृष्ण द्वारा अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया जाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  10.86.25 
न्यमन्त्रयेतां दाशार्हमातिथ्येन सह द्विजै: ।
मैथिल: श्रुतदेवश्च युगपत् संहताञ्जली ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
ठीक उसी समय, मैथिलराज और श्रुतदेव दोनों हाथ जोड़कर आगे बढ़े और दशरथ के स्वामी को ब्राह्मण मुनियों सहित अपने अतिथि बनने के लिए आमंत्रित किया।
 
At the same time Maithilraj and Shrutdeva came forward with folded hands and invited the Lord of Dasharhas along with the Brahmin sages to be their guest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)