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श्लोक 10.86.24  |
स्वानुग्रहाय सम्प्राप्तं मन्वानौ तं जगद्गुरुम् ।
मैथिल: श्रुतदेवश्च पादयो: पेततु: प्रभो: ॥ २४ ॥ |
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| अनुवाद |
| मिथिला के राजा और श्रुतदेव, दोनों ही प्रभु के चरणों में गिर पड़े और उनके मन में यही विचार था कि ब्रह्मांड के गुरु सिर्फ उन पर कृपा करने के लिए ही वहाँ आए हैं। |
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| मिथिला के राजा और श्रुतदेव, दोनों ही प्रभु के चरणों में गिर पड़े और उनके मन में यही विचार था कि ब्रह्मांड के गुरु सिर्फ उन पर कृपा करने के लिए ही वहाँ आए हैं। |
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