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श्लोक 10.86.22  |
तेऽच्युतं प्राप्तमाकर्ण्य पौरा जानपदा नृप ।
अभीयुर्मुदितास्तस्मै गृहीतार्हणपाणय: ॥ २२ ॥ |
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| अनुवाद |
| हे राजा, यह समाचार मिलते ही कि स्वामी अच्युत आ गए हैं, विदेह के नगर और गावों वासी प्रसन्नता के साथ अपने हाथों में भेंट लेकर उनका स्वागत करने चले आए। |
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| हे राजा, यह समाचार मिलते ही कि स्वामी अच्युत आ गए हैं, विदेह के नगर और गावों वासी प्रसन्नता के साथ अपने हाथों में भेंट लेकर उनका स्वागत करने चले आए। |
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