Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.85.8: हे प्रभु, आप जगत के जल तत्व के साथ साथ उसके स्वाद, प्यास शमन की क्षमता और जीवधारियों के जीवित रहने के लिए आवश्यक अन्य गुणों के भी स्वामी हैं। आप अपनी शक्तियों को वायु के रूप में भी प्रदर्शित करते हैं, जिससे शरीर में उष्णता, जीवन शक्ति, मानसिक शक्ति, शारीरिक शक्ति, प्रयत्न और गति का संचार होता है। | bhagavat अध्याय 10.85: कृष्ण द्वारा वसुदेव को उपदेश दिया जाना तथा देवकी-पुत्रों की वापसी । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे प्रभु, आप जगत के जल तत्व के साथ साथ उसके स्वाद, प्यास शमन की क्षमता और जीवधारियों के जीवित रहने के लिए आवश्यक अन्य गुणों के भी स्वामी हैं। आप अपनी शक्तियों को वायु के रूप में भी प्रदर्शित करते हैं, जिससे शरीर में उष्णता, जीवन शक्ति, मानसिक शक्ति, शारीरिक शक्ति, प्रयत्न और गति का संचार होता है।
O Lord, You are water and also its taste and its capacity to quench thirst and sustain life. You manifest Your powers through the air in the form of bodily heat, life-force, mental power, physical strength, effort and movement.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥