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श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 85: कृष्ण द्वारा वसुदेव को उपदेश दिया जाना तथा देवकी-पुत्रों की वापसी  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  10.85.47 
श्रीभगवानुवाच
आसन्मरीचे: षट् पुत्रा ऊर्णायां प्रथमेऽन्तरे ।
देवा: कं जहसुर्वीक्ष्य सुतं यभितुमुद्यतम् ॥ ४७ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान् ने कहा: प्रथम मनु के ज़माने में मरीचि ऋषि और उनकी पत्नी ऊर्णा के छह पुत्र उत्पन्न हुए। वे सभी उच्च देवता थे, लेकिन एक बार, जब उन्होंने देखा कि ब्रह्मा अपनी ही पुत्री के साथ संभोग करने वाले हैं, तो उन्हें हँसी आ गई।
 
The Lord said: In the age of the first Manu, the sage Marichi had six sons from his wife Śrīnā. They were all great demigods, but once, when they saw Brahmā ready to have intercourse with their own daughter, they laughed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)