श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 85: कृष्ण द्वारा वसुदेव को उपदेश दिया जाना तथा देवकी-पुत्रों की वापसी  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  10.85.4 
यत्र येन यतो यस्य यस्मै यद् यद् यथा यदा ।
स्यादिदं भगवान् साक्षात् प्रधानपुरुषेश्वर: ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
आप सर्वोच्च पुरुषोत्तम भगवान हैं, जो प्रकृति और प्रकृति के स्रष्टा (महाविष्णु) दोनों के स्वामी के रूप में प्रकट होते हैं। यद्यपि जो कुछ भी अस्तित्व में आता है, चाहे वह कैसे और जब भी आता हो, वह आपके भीतर, आपके द्वारा, आपसे, आपके लिए और आपके संबंध में ही निर्मित होता है।
 
You are the Supreme Personality of Godhead, manifested as the Lord of both nature and the Creator of nature (Mahavishnu). Yet everything that comes into existence, whenever it does, is in You, through You, from You, for You, and pertains to You.
तात्पर्य
साधारण पर्यवेक्षकों को पता चलता है कि ज्ञात संसार को कई अलग-अलग एजेंटों द्वारा उत्पादित किया जाता है। इस अवधारणा के अच्छे संकेत हैं भाषा ही, जिसको पारंपरिक संस्कृत व्याकरणकार प्रकृति की विविधता को दर्शाती हुई व्याख्या करते हैं। ऋषि पाण्नि द्वारा सिखाया जाने वाला मानक संस्कृत व्याकरण में क्रिया, जो कि कार्य व्यक्त करती है, उसे वाक्य का आवश्यक मूल माना जाता है, और अन्य सभी शब्द उसके संबंधित अर्थों को दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, संज्ञाओं को कई मामलों में डाला जाता है ताकि एक वाक्य में क्रिया के साथ उनके विशेष संबंध को दिखाया जा सके। संज्ञा के क्रिया के साथ इन संबंधों को कारक कहा जाता है, अर्थात् विषय के संबंध (कर्ता, "जो करता है"), वस्तु (कर्म, "जो किया जाता है"), साधन (करण, "जिसके द्वारा"), प्राप्तकर्ता (सम्प्रदान, "जिसके लिए या जिसकी ओर"), स्रोत (अपदान, "जिससे या जिसके कारण") और स्थान (अधिकरण, "जिसमें")। इन कारकों के अलावा, संज्ञाएं कभी-कभी अन्य संज्ञाओं को अधिकार रूप में भी बता सकती हैं, और समय, स्थान और तरीके के भी विभिन्न प्रकार के क्रियाविशेषण हैं। लेकिन यद्यपि भाषा इस प्रकार प्रकट निर्माण में कई अलग-अलग एजेंटों की गतिविधि को इंगित करती है, गहरा सत्य यह है कि सभी व्याकरणिक रूप सबसे पहले भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व को संदर्भित करते हैं। इस पद्य में वासुदेव इस बात को अपने दो महान पुत्रों को विभिन्न व्याकरणिक रूपों के संदर्भ में महिमामंडित करके व्यक्त करते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)