श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 85: कृष्ण द्वारा वसुदेव को उपदेश दिया जाना तथा देवकी-पुत्रों की वापसी  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  10.85.39 
बलिरुवाच
नमोऽनन्ताय बृहते नम: कृष्णाय वेधसे ।
साङ्ख्ययोगवितानाय ब्रह्मणे परमात्मने ॥ ३९ ॥
 
 
अनुवाद
राजा बलि ने कहा: समस्त प्राणियों में महानतम अनंत देव को प्रणाम है। ब्रह्मांड के रचयिता भगवान कृष्ण को प्रणाम है, जो सांख्य और योग के सिद्धांतों का प्रसार करने के लिए निराकार ब्रह्म और परमात्मा के रूप में प्रकट होते हैं।
 
King Bali said: Salutations to Ananta Deva, the greatest of all beings. Salutations to Lord Krishna, the creator of the universe, who appears as the impersonal Brahman and Paramatma to spread the principles of Sankhya and Yoga.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती यहाँ सर्वोच्च अनंत को भगवान बलराम के रूप में पहचानते हैं, जिनसे दिव्य सर्प अनंत शेष का विस्तार होता है। सांख्येय दार्शनिकों के ग्रंथों का स्रोत अवयक्तिगत ब्रह्म है, जबकि योग के पाठ्यपुस्तकों का प्रसार परमात्मा के रूप में जाने जाने वाले भगवान के व्यक्तिगत प्रतिनिधित्व द्वारा किया गया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)