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bhagavat 10.85.30: मेरा जन्म धारण करके अब तुम इस संसार में उन राजाओं के संहार हेतु अवतरित हुए हो जिनके अच्छे गुणों को वर्तमान युग ने नष्ट कर दिया है और जो इस प्रकार शास्त्रों के अधिकार का उल्लंघन करते हुए पृथ्वी पर बोझ बन रहे हैं।   |   bhagavat अध्याय 10.85: कृष्ण द्वारा वसुदेव को उपदेश दिया जाना तथा देवकी-पुत्रों की वापसी   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 85: कृष्ण द्वारा वसुदेव को उपदेश दिया जाना तथा देवकी-पुत्रों की वापसी  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  10.85.30 
कालविध्वस्तसत्त्वानां राज्ञामुच्छास्‍त्रवर्तिनाम् ।
भूमेर्भारायमाणानामवतीर्णौ किलाद्य मे ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
मेरा जन्म धारण करके अब तुम इस संसार में उन राजाओं के संहार हेतु अवतरित हुए हो जिनके अच्छे गुणों को वर्तमान युग ने नष्ट कर दिया है और जो इस प्रकार शास्त्रों के अधिकार का उल्लंघन करते हुए पृथ्वी पर बोझ बन रहे हैं।
 
Being born from Me, You have appeared in this world to kill those kings whose excellent qualities have been destroyed by the present age and who thus violate the authority of the scriptures and become a burden on the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)