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bhagavat 10.85.26: शुकदेव गोस्वामी ने कहा: हे राजन, भगवान के द्वारा कहे गए इन उपदेशों को सुनकर वसुदेव जी द्वैत भाव से मुक्त हो गए थे। उनके हृदय में संतुष्टि थी और वे मौन रह गए थे।   |   bhagavat अध्याय 10.85: कृष्ण द्वारा वसुदेव को उपदेश दिया जाना तथा देवकी-पुत्रों की वापसी   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 85: कृष्ण द्वारा वसुदेव को उपदेश दिया जाना तथा देवकी-पुत्रों की वापसी  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  10.85.26 
श्रीशुक उवाच
एवं भगवता राजन् वसुदेव उदाहृत: ।
श्रुत्वा विनष्टनानाधीस्तूष्णीं प्रीतमना अभूत् ॥ २६ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: हे राजन, भगवान के द्वारा कहे गए इन उपदेशों को सुनकर वसुदेव जी द्वैत भाव से मुक्त हो गए थे। उनके हृदय में संतुष्टि थी और वे मौन रह गए थे।
 
Sukadeva Goswami said: O King, after listening to these instructions given by the Lord, Vasudeva was freed from all dualistic feelings. Satisfied in his heart, he remained silent.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)