आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी जैसे तत्व अलग-अलग वस्तुओं में प्रकट होते समय दिखने वाले, अदृश्य, छोटे या बड़े हो जाते हैं। इसी तरह, परमात्मा एक होते हुए भी अनेक रूपों में दिखाई देते हैं।
Sky, air, fire, water and earth—these elements become visible, invisible, small or huge when they appear in various objects. Similarly, God appears to be many even though He is one.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती इस और पिछले श्लोक की व्याख्या इस प्रकार करते हैं: एक परमात्मा प्रकृति के गुणों के प्रभाव से बहुतों के रूप में प्रकट होते हैं जिसका निर्माण स्वयं उन्होंने किया है। कैसे? क्योंकि यद्यपि सत्य में परमात्मा स्व-प्रकाशित, शाश्वत, हर चीज़ से अलग और प्रकृति के गुणों से मुक्त होता है, पर जब वे अपने अभिव्यक्तियों के रूप में प्रकट होते हैं तब वे बिल्कुल विपरीत प्रतीत होते हैं-प्रकृति के गुणों से संतृप्त अस्थायी वस्तुओं की बहुलता। जैसे आकाश और अन्य तत्व, जब पेंडों और अन्य चीज़ों में प्रकट होते हैं, तो प्रकट होते और गायब होते प्रतीत होते हैं, उसी तरह परमात्मा अपने विभिन्न अभिव्यक्तियों में प्रकट होते और गायब होते प्रतीत होते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥