Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.85.2: अपने दोनों पुत्रों की शक्ति के बारे में महान ऋषियों के कथनों को सुनकर और उनके वीरतापूर्ण कार्यों को देखकर, वसुदेव उनकी दिव्यता के प्रति पूरी तरह से आश्वस्त हो गये। इसलिए, उनका नाम लेकर, उन्होंने उनसे इस प्रकार कहा। | bhagavat अध्याय 10.85: कृष्ण द्वारा वसुदेव को उपदेश दिया जाना तथा देवकी-पुत्रों की वापसी । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मुनीनां स वच: श्रुत्वा पुत्रयोर्धामसूचकम् ।
तद्वीर्यैर्जातविश्रम्भ: परिभाष्याभ्यभाषत ॥ २ ॥
अनुवाद
अपने दोनों पुत्रों की शक्ति के बारे में महान ऋषियों के कथनों को सुनकर और उनके वीरतापूर्ण कार्यों को देखकर, वसुदेव उनकी दिव्यता के प्रति पूरी तरह से आश्वस्त हो गये। इसलिए, उनका नाम लेकर, उन्होंने उनसे इस प्रकार कहा।
Having heard the sages speak about the strength of his two sons and having seen their heroic deeds, Vasudeva had full faith in their divinity. So, taking their names, he spoke to them as follows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥