Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.85.17: आप स्नेह की रस्सियों से इस पूरे विश्व को बांधे रखते हैं, जिससे जब लोग अपने भौतिक शरीरों पर विचार करते हैं, तो वे सोचते हैं, "यह मैं हूँ", और जब वे अपनी संतान और अन्य संबंधियों पर विचार करते हैं, तो वे सोचते हैं, "ये मेरे हैं।" | bhagavat अध्याय 10.85: कृष्ण द्वारा वसुदेव को उपदेश दिया जाना तथा देवकी-पुत्रों की वापसी । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आप स्नेह की रस्सियों से इस पूरे विश्व को बांधे रखते हैं, जिससे जब लोग अपने भौतिक शरीरों पर विचार करते हैं, तो वे सोचते हैं, "यह मैं हूँ", और जब वे अपनी संतान और अन्य संबंधियों पर विचार करते हैं, तो वे सोचते हैं, "ये मेरे हैं।"
You bind the whole universe together with the cords of affection, so when people think of their material bodies, they think, “This is mine,” and when they think of their children and other relatives, they think, “These are mine.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥