माया ततमिदम सर्वं
जगदव्यक्त-मूर्तिना
मत-स्थाणि सर्व-भूतानि
ना चाहां तेष्ववस्थितः
ना च मत-स्थाणि भूतानि
पश्य मे योगम ऐश्वरम
भूत-भृन्नच भूत-स्थो
मामात्मा भूत-भावनः
"मेरे द्वारा, मेरे अव्यक्त रूप में, इस संपूर्ण ब्रह्मांड का व्याप्त है। सभी प्राणी मुझमें हैं, लेकिन मैं उनमें नहीं हूँ। और फिर भी सभी जो कुछ बनाया गया है वह मुझमें नहीं टिका है। मेरे रहस्यमयी ऐश्वर्य को देखो! यद्यपि मैं सभी जीवों का पालनहार हूँ और यद्यपि मैं हर जगह हूँ, मैं इस ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति का हिस्सा नहीं हूँ, क्यूँकि मेरा स्वरूप सृष्टि का स्रोत है।"
