श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 85: कृष्ण द्वारा वसुदेव को उपदेश दिया जाना तथा देवकी-पुत्रों की वापसी  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  10.85.11 
भूतानामसि भूतादिरिन्द्रियाणां च तैजस: ।
वैकारिको विकल्पानां प्रधानमनुशायिनम् ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
आप ही तमोगुणी मिथ्या अहंकार हैं, जो भौतिक तत्त्वों के उद्गम हैं; आप रजोगुणी मिथ्या अहंकार हैं, जो शारीरिक इंद्रियों के उत्स हैं; आप सतोगुणी मिथ्या अहंकार हैं, जो देवताओं के स्रोत हैं; और आप ही अप्रकट सम्पूर्ण भौतिक ऊर्जा हैं, जो हर वस्तु के मूल आधार हैं।
 
आप ही तमोगुणी मिथ्या अहंकार हैं, जो भौतिक तत्त्वों के उद्गम हैं; आप रजोगुणी मिथ्या अहंकार हैं, जो शारीरिक इंद्रियों के उत्स हैं; आप सतोगुणी मिथ्या अहंकार हैं, जो देवताओं के स्रोत हैं; और आप ही अप्रकट सम्पूर्ण भौतिक ऊर्जा हैं, जो हर वस्तु के मूल आधार हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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