श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 83: कृष्ण की रानियों से द्रौपदी की भेंट  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  10.83.5 
श्रीऋषिरुवाच
इत्युत्तम:श्लोकशिखामणिं जने-
ष्वभिष्टुवत्स्वन्धककौरवस्‍त्रिय: ।
समेत्य गोविन्दकथा मिथोऽगृणं-
स्‍त्रिलोकगीता: श‍ृणु वर्णयामि ते ॥ ५ ॥
 
 
अनुवाद
ऋषिवर शुकदेव गोस्वामी ने कहा: जब युधिष्ठिर और अन्य लोग महापुरुषों में श्रेष्ठ भगवान् कृष्ण की इस प्रकार प्रशंसा कर रहे थे, तब अंधक और कौरव वंश की महिलाएँ आपस में मिलीं और तीनों लोकों में गाई जाने वाली गोविंद की कथाओं पर चर्चा करने लगीं। कृपया सुनो, क्योंकि मैं तुम्हें उन कथाओं का वर्णन करने जा रहा हूँ।
 
The great sage Sukadeva Goswami said: When Yudhishthira and others were thus praising Lord Krishna, the best among great souls, the women of the Andhaka and Kaurava clans met each other and began discussing the tales of Govinda that are sung in the three worlds. Please listen, for I am going to narrate them to you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)