श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 83: कृष्ण की रानियों से द्रौपदी की भेंट  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  10.83.34 
तेऽन्वसज्जन्त राजन्या निषेद्धुं पथि केचन ।
संयत्ता उद्‍धृतेष्वासा ग्रामसिंहा यथा हरिम् ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
राजाओं ने भगवान् का पीछा उन गांव के कुत्तों की तरह किया जो शेर का पीछा करते हैं। कुछ राजाओं ने अपने धनुष उठाए हुए थे और राह में ही उन्हें रोकने के लिए आ डटे।
 
The kings pursued the Lord like village dogs pursue a lion. Some kings, with their bows raised, stood in the way to prevent Him from passing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)