श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 83: कृष्ण की रानियों से द्रौपदी की भेंट  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  10.83.27 
दिवि दुन्दुभयो नेदुर्जयशब्दयुता भुवि ।
देवाश्च कुसुमासारान् मुमुचुर्हर्षविह्वला: ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
आकाश में नगाड़े बजने लगे और धरती पर लोग "जय! जय!" चिल्लाने लगे। देवता बहुत खुश हुए और फूलों की बारिश करने लगे।
 
The drums started playing in the sky and people on the earth started shouting Jai! Jai! The gods were very happy and showered flowers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)