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bhagavat 10.81.33: [सुदामा ने सोचा] : मैं हमेशा से ही ग़रीब रहा हूँ। निश्चित ही मुझ जैसे भाग्यहीन व्यक्ति के अचानक अमीर बन जाने का एकमात्र कारण यही हो सकता है कि यदुवंश के परम ऐश्वर्यशाली प्रधान भगवान् कृष्ण ने मुझ पर अपनी कृपा की दृष्टि डाली है।   |   bhagavat अध्याय 10.81: भगवान् द्वारा सुदामा ब्राह्मण को वरदान   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 81: भगवान् द्वारा सुदामा ब्राह्मण को वरदान  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  10.81.33 
नूनं बतैतन्मम दुर्भगस्य
शश्वद्दरिद्रस्य समृद्धिहेतु: ।
महाविभूतेरवलोकतोऽन्यो
नैवोपपद्येत यदूत्तमस्य ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
[सुदामा ने सोचा] : मैं हमेशा से ही ग़रीब रहा हूँ। निश्चित ही मुझ जैसे भाग्यहीन व्यक्ति के अचानक अमीर बन जाने का एकमात्र कारण यही हो सकता है कि यदुवंश के परम ऐश्वर्यशाली प्रधान भगवान् कृष्ण ने मुझ पर अपनी कृपा की दृष्टि डाली है।
 
[Sudama thought]: I have always been poor. Surely the only possible reason why an unfortunate person like me has suddenly become rich is that Lord Krishna, the most glorious head of the Yadu clan, has bestowed His blessings upon me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)