श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 81: भगवान् द्वारा सुदामा ब्राह्मण को वरदान  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  10.81.20 
अधनोऽयं धनं प्राप्य माद्यन्नुच्चैर्न मां स्मरेत् ।
इति कारुणिको नूनं धनं मेऽभूरि नाददात् ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
यह सोचकर कि अगर ये गरीब अचानक अमीर हो गया तो ये अपने नशे में चूर सुख में मेरा नाम भूल जाएगा, दयालु भगवान ने मुझे थोड़ा-बहुत धन भी नहीं दिया।
 
Thinking that if this poor man suddenly becomes rich, he will forget me in intoxicating happiness, the merciful God did not give me even a bit of money.
तात्पर्य
सुदामा के इस कथन को कि भगवान कृष्ण ने उन्हें 'थोड़ा भी ऐश्वर्य' नहीं दिया, यह भी लिया जा सकता है कि उन्हें थोड़ा सा ऐश्वर्य देने के बदले भगवान ने उन्हें अपने सत्संग का अथाह खज़ाना दिया। यह वैकल्पिक अर्थ श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ने दिया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)