श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 81: भगवान् द्वारा सुदामा ब्राह्मण को वरदान  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  10.81.15 
अहो ब्रह्मण्यदेवस्य द‍ृष्टा ब्रह्मण्यता मया ।
यद् दरिद्रतमो लक्ष्मीमाश्लिष्टो बिभ्रतोरसि ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
[सुदामा ने सोचा] : भगवान् कृष्ण ब्राह्मणों के भक्त हैं, यह सर्वविदित है और अब मैंने अपनी आँखों से इस भक्ति को देखा है। वही कृष्ण, जिनके सीने पर लक्ष्मीजी निवास करती हैं, उन्होंने एक दरिद्र भिखारी को गले लगाया।
 
[Sudama thought]: Lord Krishna is renowned as a devotee of Brahmins and now I have seen this devotion myself. Indeed, He, who holds Goddess Lakshmi on His chest, has embraced the poorest beggar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)