श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 81: भगवान् द्वारा सुदामा ब्राह्मण को वरदान  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  10.81.12 
ब्राह्मणस्तां तु रजनीमुषित्वाच्युतमन्दिरे ।
भुक्त्वा पीत्वा सुखं मेने आत्मानं स्वर्गतं यथा ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
[शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा] : ब्राह्मण ने खूब सारा खाना और पानी पीने के बाद उस रात को भगवान अच्युत के महल में गुज़ारी। उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो वैकुण्ठ लोक में आ गया हो।
 
[Sukadeva Goswami further said] : After eating and drinking to his heart's content, that Brahmin spent the night in the palace of Lord Achyuta. He felt as if he had come to the Vaikuntha-loka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)