श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 80: द्वारका में भगवान् श्रीकृष्ण से ब्राह्मण सुदामा की भेंट  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  10.80.39 
एतद् विदित्वा उदिते रवौ सान्दीपनिर्गुरु: ।
अन्वेषमाणो न: शिष्यानाचार्योऽपश्यदातुरान् ॥ ३९ ॥
 
 
अनुवाद
हमारे गुरु सान्दीपनि, हमारी मुश्किल स्थिति को समझते हुए, सूर्योदय होते ही हम शिष्यों की तलाश में निकल पडे और हमें परेशानी में पाया।
 
Our Guru Sandipaani, understanding our difficult situation, went out at sunrise to look for us disciples and found us trapped in trouble.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)