सभी जीवों की आत्मा रूप में मैं अनुष्ठानिक पूजा-पाठ, पंडितों द्वारा किए जाने वाले कर्मकाण्ड, तपस्या या आत्म-अनुशासन द्वारा उतना संतुष्ट नहीं होता, जितना मैं किसी व्यक्ति की अपने गुरु के प्रति की गई श्रद्धापूर्ण सेवा से संतुष्ट होता हूँ।
I, the soul of all living beings, am not satisfied by ritualistic worship, Brahmin initiation, austerity or self-discipline, as much as I am satisfied by a man's devoted service to his Guru.
तात्पर्य
प्रजाति शब्द से यहाँ या तो अच्छे बच्चों को जन्म देना या वैदिक संस्कृति में अनुष्ठानिक दीक्षा द्वारा प्राप्त दूसरा जन्म दर्शाया जाता है। हालाँकि ये दोनों प्रशंसनीय हैं, भगवान कृष्ण यहाँ बताते हैं कि एक वास्तविक आध्यात्मिक गुरु को प्रदान की गई निष्ठावान सेवा अभी भी उच्च है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥