श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 80: द्वारका में भगवान् श्रीकृष्ण से ब्राह्मण सुदामा की भेंट  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  10.80.30 
केचित् कुर्वन्ति कर्माणि कामैरहतचेतस: ।
त्यजन्त: प्रकृतीर्दैवीर्यथाहं लोकसङ्ग्रहम् ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग भगवान् की माया से उत्पन्न भौतिक इच्छाओं को त्यागकर सांसारिक इच्छाओं से अपने मन को स्थिर रखते हुए सांसारिक कर्म करते हैं। वे काम उसी तरह से करते हैं जैसे मैं सामान्य जनों को सिखाने के लिए करता हूँ।
 
Some people abandon all material desires born of the illusory energy of the Lord and perform worldly duties while keeping their mind free from worldly desires. They perform their duties in the same manner as I perform my duties to teach the common people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)