श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 80: द्वारका में भगवान् श्रीकृष्ण से ब्राह्मण सुदामा की भेंट  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  10.80.27 
कथयां चक्रतुर्गाथा: पूर्वा गुरुकुले सतो: ।
आत्मनोर्ललिता राजन् करौ गृह्य परस्परम् ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
[शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा]: हे राजा, एक-दूसरे का हाथ पकड़कर कृष्ण और सुदामा बहुत खुशी-खुशी बातें कर रहे थे कि कैसे वे दोनों अपने गुरु के विद्यालय में एक साथ रहा करते थे।
 
[शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा]: हे राजा, एक-दूसरे का हाथ पकड़कर कृष्ण और सुदामा बहुत खुशी-खुशी बातें कर रहे थे कि कैसे वे दोनों अपने गुरु के विद्यालय में एक साथ रहा करते थे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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