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bhagavat 10.80.23: सर्वशक्तिमान लक्ष्मी देवी ने स्वयं उस दरिद्र ब्राह्मण की सेवा की जो फटे-पुराने वस्त्रों में था तथा अत्यंत कृश था जिससे उसके शरीर की नसें बाहर आ गई थीं और फिर भी उसने अपनी चँवर से उसे हवा की।   |   bhagavat अध्याय 10.80: द्वारका में भगवान् श्रीकृष्ण से ब्राह्मण सुदामा की भेंट   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 80: द्वारका में भगवान् श्रीकृष्ण से ब्राह्मण सुदामा की भेंट  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  10.80.23 
कुचैलं मलिनं क्षामं द्विजं धमनिसन्ततम् ।
देवी पर्यचरत् साक्षाच्चामरव्यजनेन वै ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
सर्वशक्तिमान लक्ष्मी देवी ने स्वयं उस दरिद्र ब्राह्मण की सेवा की जो फटे-पुराने वस्त्रों में था तथा अत्यंत कृश था जिससे उसके शरीर की नसें बाहर आ गई थीं और फिर भी उसने अपनी चँवर से उसे हवा की।
 
Goddess Lakshmi herself, by fanning him with her chamar, served the poor brahmin whose clothes were torn and dirty and who was so weak that the veins of his whole body were visible.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)