कुचैलं मलिनं क्षामं द्विजं धमनिसन्ततम् ।
देवी पर्यचरत् साक्षाच्चामरव्यजनेन वै ॥ २३ ॥
अनुवाद
सर्वशक्तिमान लक्ष्मी देवी ने स्वयं उस दरिद्र ब्राह्मण की सेवा की जो फटे-पुराने वस्त्रों में था तथा अत्यंत कृश था जिससे उसके शरीर की नसें बाहर आ गई थीं और फिर भी उसने अपनी चँवर से उसे हवा की।
Goddess Lakshmi herself, by fanning him with her chamar, served the poor brahmin whose clothes were torn and dirty and who was so weak that the veins of his whole body were visible.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥