श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 8: भगवान् कृष्ण द्वारा अपने मुख के भीतर विराट रूप का प्रदर्शन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  10.8.34 
कस्मान्मृदमदान्तात्मन् भवान्भक्षितवान्‌ रह: ।
वदन्ति तावका ह्येते कुमारास्तेऽग्रजोऽप्ययम् ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
हे कृष्ण, तुम इतने चंचल क्यों हो कि अकेले में तुमने मिट्टी खा ली? यह शिकायत तुम्हारे सारे साथी-दोस्तों ने की है, जिसमें तुम्हारे बड़े भाई बलराम भी शामिल हैं। ऐसा क्या माजरा है?
 
O Krishna, why are you so restless that you ate mud in a secluded place? This complaint has been made by your friends, including your elder brother Balarama. How did this happen?
तात्पर्य
माता यशोदा कृष्ण के अत्यधिक शरारती व्यवहार से परेशान हो गई थीं। उनका घर मिष्ठानों से भरा हुआ था। फिर वो अकेले में मिट्टी क्यों खा रहे थे? कृष्ण ने जवाब दिया, "माँ मेरे बारे में सभी ने मिलकर षडयंत्र रचा है और तुम्हें मेरी शिकायत की है ताकि तुम मुझे दंडित करो। मेरे बड़े भाई बलराम भी उनके साथ हो लिए हैं। मैंने कुछ भी ऐसा नहीं किया है। तुम मेरी बात सच मानो। क्रोध मत करो और मुझे दंडित मत करो।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)