Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.8.2: जब नंद महाराज ने गर्ग मुनि को अपने घर में देखा तो वे अति प्रसन्नता से दोनों हाथों को जोड़कर उनका स्वागत करते हुए खड़े हो गए। हालाँकि नंद महाराज गर्ग मुनि को अपनी आँखों से देख रहे थे, लेकिन वे जानते थे कि गर्ग मुनि कोई साधारण व्यक्ति नहीं हैं, उन्हें वे अधोक्षज के रूप में मानते थे। | bhagavat अध्याय 10.8: भगवान् कृष्ण द्वारा अपने मुख के भीतर विराट रूप का प्रदर्शन । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब नंद महाराज ने गर्ग मुनि को अपने घर में देखा तो वे अति प्रसन्नता से दोनों हाथों को जोड़कर उनका स्वागत करते हुए खड़े हो गए। हालाँकि नंद महाराज गर्ग मुनि को अपनी आँखों से देख रहे थे, लेकिन वे जानते थे कि गर्ग मुनि कोई साधारण व्यक्ति नहीं हैं, उन्हें वे अधोक्षज के रूप में मानते थे।
When Nanda Maharaj saw Garg Muni present in his house, he was so happy that he stood up with folded hands to welcome him. Although Nanda Maharaj was able to see Garg Muni with his eyes, he considered him to be Adhokshaj, that is, he was not an ordinary person visible to the physical senses.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥