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bhagavat 10.8.18: देवताओं के साथ भगवान विष्णु सदैव रहते हैं, इसलिए असुर देवताओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकते। ठीक इसी तरह से, कोई भी व्यक्ति या समूह जो कृष्ण से जुड़ा है, अत्यंत भाग्यशाली है। चूंकि ऐसे व्यक्ति कृष्ण से बहुत अधिक स्नेह रखते हैं, इसलिए वे कंस के साथियों (या आंतरिक शत्रुओं और इंद्रियों) जैसे असुरों द्वारा कभी परास्त नहीं किये जा सकते।   |   bhagavat अध्याय 10.8: भगवान् कृष्ण द्वारा अपने मुख के भीतर विराट रूप का प्रदर्शन   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 8: भगवान् कृष्ण द्वारा अपने मुख के भीतर विराट रूप का प्रदर्शन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  10.8.18 
य एतस्मिन् महाभागा: प्रीतिं कुर्वन्ति मानवा: ।
नारयोऽभिभवन्त्येतान् विष्णुपक्षानिवासुरा: ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
देवताओं के साथ भगवान विष्णु सदैव रहते हैं, इसलिए असुर देवताओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकते। ठीक इसी तरह से, कोई भी व्यक्ति या समूह जो कृष्ण से जुड़ा है, अत्यंत भाग्यशाली है। चूंकि ऐसे व्यक्ति कृष्ण से बहुत अधिक स्नेह रखते हैं, इसलिए वे कंस के साथियों (या आंतरिक शत्रुओं और इंद्रियों) जैसे असुरों द्वारा कभी परास्त नहीं किये जा सकते।
 
With Lord Viṣṇu always on the side of the demigods, the demons cannot harm the demigods. Similarly, any person or community devoted to Kṛṣṇa is extremely fortunate. Since such people have great affection for Kṛṣṇa, they can never be defeated by Kamsa's associates, the demons (or the internal enemies and the senses).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)