श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 8: भगवान् कृष्ण द्वारा अपने मुख के भीतर विराट रूप का प्रदर्शन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  10.8.12 
श्रीगर्ग उवाच
अयं हि रोहिणीपुत्रो रमयन् सुहृदो गुणै: ।
आख्यास्यते राम इति बलाधिक्याद्बलं विदु: ।
यदूनामपृथग्भावात् सङ्कर्षणमुशन्त्यपि ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
गर्ग मुनि ने कहा: यह रोहिणी का पुत्र अपने दिव्य गुणों से अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को सभी तरह का सुख देगा। इसलिए उसे राम कहा जाएगा। और क्योंकि वह असाधारण शारीरिक शक्ति दिखाएगा, इसलिए उसे बलराम भी कहा जाएगा। इसके अलावा, क्योंकि वह दो परिवारों - वसुदेव के परिवार और नंद महाराज के परिवार को एकजुट करता है, इसलिए उसे संकर्षण भी कहा जाएगा।
 
Gargamuni said: This son of Rohini will provide all kinds of happiness to his relatives and friends by his divine qualities. Therefore, he will be called Rama. And because of his extraordinary physical strength, he will also be called Balarama. Since he is going to unite two families—the families of Vasudeva and Nanda Maharaja—he will also be called Sankarshana.
तात्पर्य

बाला देव वास्तव में देवकी के पुत्र थे, लेकिन उन्हें देवकी के गर्भ से रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया गया था। यह तथ्य छिपाकर रखा गया था। हरिवंश के एक कथन के अनुसार:

प्रत्युवाच ततो रामः

सर्वाम्स तान् अभितः स्थितान

यादवेष्व पि सर्वेषु

भवन्तो मम वल्लभाः

गर्ग मुनि ने नंद महाराज को यह बता दिया कि बलराम को संकर्षण इसलिए कहा गया क्योंकि उन्होंने दो परिवारों - यदु-वंश और नन्द महाराज के वंश - को एक किया था। इनमें से एक को क्षत्रिय और दूसरे को वैश्य के रूप में जाना जाता था। दोनों परिवारों का एक ही मूल पूर्वज था, केवल अंतर यह था कि नंद महाराज एक वैश्य पत्नी के पुत्र थे जबकि वसुदेव एक क्षत्रिय पत्नी के पुत्र थे। बाद में, नंद महाराज ने एक वैश्य पत्नी से विवाह किया, और वसुदेव ने एक क्षत्रिय पत्नी से विवाह किया। इसलिए, हालांकि नंद महाराज और वसुदेव दोनों परिवार एक ही पिता से आते थे, लेकिन उन्हें क्षत्रिय और वैश्य के रूप में विभाजित किया गया था। अब बलादेव ने उन्हें एकजुट किया और इसलिए उन्हें संकर्षण के नाम से जाना जाने लगा।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)