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bhagavat 10.77.22: [उस व्यक्ति ने कहा]: हे कृष्ण, हे कृष्ण, हे महाबाहो, हे अपने माता-पिता के प्रिय, शाल्व तुम्हारे पिता को बंदी बनाकर ले गया है, जैसे कोई कसाई किसी पशु को वधशाला में ले जाता है।   |   bhagavat अध्याय 10.77: कृष्ण द्वारा शाल्व का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 77: कृष्ण द्वारा शाल्व का वध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  10.77.22 
कृष्ण कृष्ण महाबाहो पिता ते पितृवत्सल ।
बद्ध्वापनीत: शाल्वेन सौनिकेन यथा पशु: ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
[उस व्यक्ति ने कहा]: हे कृष्ण, हे कृष्ण, हे महाबाहो, हे अपने माता-पिता के प्रिय, शाल्व तुम्हारे पिता को बंदी बनाकर ले गया है, जैसे कोई कसाई किसी पशु को वधशाला में ले जाता है।
 
[The man said] : O Kṛṣṇa, O Kṛṣṇa, O mighty-armed one, O beloved of your parents, Śālva has bound up your father and taken him away just as a butcher takes an animal to slaughter.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)