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bhagavat 10.75.9: अवभृथ स्नानोत्सव के समय अनेक प्रकार के वाद्य यंत्र बजने लगे, जिनमें मृदंग, शंख, पणव, धुन्धुरि, नगाड़ा और गोमुख वाद्य यंत्र विशेष रूप से उल्लेखनीय थे।   |   bhagavat अध्याय 10.75: दुर्योधन का मानमर्दन   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 75: दुर्योधन का मानमर्दन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  10.75.9 
मृदङ्गशङ्खपणवधुन्धुर्यानकगोमुखा: ।
वादित्राणि विचित्राणि नेदुरावभृथोत्सवे ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
अवभृथ स्नानोत्सव के समय अनेक प्रकार के वाद्य यंत्र बजने लगे, जिनमें मृदंग, शंख, पणव, धुन्धुरि, नगाड़ा और गोमुख वाद्य यंत्र विशेष रूप से उल्लेखनीय थे।
 
At the time of Avabhṛtha Snanotsav, many kinds of musical instruments were played, among which were Mridang, Shankh, Panava, Dhundhuri, Aanak and Gomukh.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)