श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 75: दुर्योधन का मानमर्दन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  10.75.8 
ऋत्विक्सदस्यबहुवित्सु सुहृत्तमेषु
स्विष्टेषु सूनृतसमर्हणदक्षिणाभि: ।
चैद्ये च सात्वतपतेश्चरणं प्रविष्टे
चक्रुस्ततस्त्ववभृथस्‍नपनं द्युनद्याम् ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
जब सभी पुरोहित, प्रमुख प्रतिनिधि, विद्वान संत और राजा के घनिष्ठ हितैषी मधुर शब्दों, शुभ उपहारों और विविध भेंटों के रूप में दक्षिणा से अच्छी तरह सम्मानित हो चुके थे और जब चेदिराज सात्वतों के प्रभु के चरणों में प्रवेश कर चुका था, तो दैवी नदी यमुना में अवभृथ स्नान संपन्न किया गया।
 
When all the priests, chief representatives, learned saints and close well-wishers of the king had been thoroughly honored with dakshina in the form of sweet words, auspicious gifts and various offerings and when the Chedi king had entered the lotus feet of the Lord of Satvatas, then the ablutions bath was performed in the divine river Yamuna.
तात्पर्य
विशिष्ट अतिथियों को दिए गए उपहार में बहुमूल्य आभूषण शामिल थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)