भागवान मधुपति की हजारों रानियां महल में ठहरी हुई थी। उनके कूल्हों के भारी भार से उनके कदम धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे और पायल में बंधे घुँघरू भी मधुर आवाज़ कर रहे थे। उनकी कमर अत्यंत पतली थी, उनके स्तनों पर लगा कुमकुम उनकी मोतियों की मालाओं को लाल रंग में रंगे हुए था। उनके झिलमिलाते और हिलते हुए झुमके और लहराते हुए बाल उनके चेहरों की सुंदरता को चार चांद लगा रहे थे।
Thousands of queens of Lord Madhupati were also staying in the palace. Their feet moved slowly due to the weight of their buttocks and their anklets made a pleasant sound. Their waists were extremely slender, their pearl necklaces had turned red due to the kumkum on their breasts. Their swinging earrings and flowing hair enhanced the splendid beauty of their faces.
तात्पर्य
श्रील प्रभुपाद लिखते हैं: "राजा युधिष्ठिर के राजमहल में ऐसी सुंदरियों को देखकर दुर्योधन ईर्ष्यालु हो गया। वह द्रौपदी की सुंदरता को देखकर विशेष रूप से ईर्ष्यालु और कामुक हो गया क्योंकि उसके मन में पाण्डवों से विवाह की प्रारंभ से ही एक विशेष आकर्षण था। द्रौपदी के विवाह समारोह में दुर्योधन भी मौजूद था, और अन्य राजकुमारों के साथ वह द्रौपदी की सुंदरता पर बहुत मोहित हो गया था, लेकिन वह उसे प्राप्त करने में विफल रहा।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥