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bhagavat 10.75.28: उस समय राजा युधिष्ठिर ने अपने अनेक मित्रों, निकट सम्बन्धियों तथा बान्धवों को विदा होने से रोक लिया, जिनमें कृष्ण भी थे। युधिष्ठिर स्नेह के वशीभूत होकर उन्हें विदा नहीं कर सके क्योंकि उन्हें आसन्न विरह की वेदना का भान हो रहा था।   |   bhagavat अध्याय 10.75: दुर्योधन का मानमर्दन   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 75: दुर्योधन का मानमर्दन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  10.75.28 
ततो युधिष्ठिरो राजा सुहृत्सम्बन्धिबान्धवान् ।
प्रेम्णा निवारयामास कृष्णं च त्यागकातर: ॥ २८ ॥
 
 
अनुवाद
उस समय राजा युधिष्ठिर ने अपने अनेक मित्रों, निकट सम्बन्धियों तथा बान्धवों को विदा होने से रोक लिया, जिनमें कृष्ण भी थे। युधिष्ठिर स्नेह के वशीभूत होकर उन्हें विदा नहीं कर सके क्योंकि उन्हें आसन्न विरह की वेदना का भान हो रहा था।
 
At that time King Yudhishthira stopped many of his friends, close relatives and friends, including Krishna, from leaving. Overwhelmed with love, Yudhishthira did not let them go because he was feeling the pain of impending separation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)