श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 71: भगवान् की इन्द्रप्रस्थ यात्रा  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  10.71.9 
गायन्ति ते विशदकर्म गृहेषु देव्यो
राज्ञां स्वशत्रुवधमात्मविमोक्षणं च ।
गोप्यश्च कुञ्जरपतेर्जनकात्मजाया:
पित्रोश्च लब्धशरणा मुनयो वयं च ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
क़ैद किए गए राजाओं की दैवी पत्नियाँ आपके सत्कर्मों का गुणगान करती हैं - कि आप किस प्रकार उनके पतियों के शत्रुओं को मारकर उनका उद्धार करेंगे। गोपियाँ भी आपकी महिमा गाती हैं कि आपने कैसे गजेन्द्र के शत्रु, जनक की पुत्री सीता के शत्रु और अपने माता-पिता के शत्रुओं को भी मार डाला। इसी तरह से जिन ऋषियों ने आपकी शरण ली है, वे भी हमारी तरह आपकी स्तुति करते हैं।
 
The divine wives of the captive kings sing of Your noble deeds, of how You will kill the enemies of their husbands and deliver them. The gopis also praise You, of how You killed the enemy of Gajendra, the enemy of Sita, the daughter of Janaka, and the enemy of Your parents. Similarly, the sages who have taken refuge in You sing Your praises, just as we do.
तात्पर्य
महान ऋषियों और भक्तों ने कारावास में बंद राजाओं की दुखी पत्नियों को सूचित किया था कि भगवान कृष्ण जरासंध को मारने का प्रबंध करेंगे और इस प्रकार उन्हें उनके संकट से बचाएंगे। ये ईश्वरीय स्त्रियाँ घर पर प्रभु की महिमा का गुणगान करती थीं, और जब उनके बच्चे अपने पिता के लिए रोते थे, तो उनकी माताएँ उन्हें बताती थीं, "बच्चे, मत रोओ। श्री कृष्ण तुम्हारे पिता को बचाएंगे।" वास्तव में, प्रभु ने अतीत में कई भक्तों को बचाया है, जैसा कि यहाँ वर्णित है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)