राजा युधिष्ठिर को प्रसन्न करने की इच्छा से भगवान् कई महीनों तक इंद्रप्रस्थ में रहे। अपने प्रवास काल में उन्होंने और अर्जुन ने अग्निदेव को खाण्डव वन भेंट कर संतुष्ट किया। उन्होंने मय दानव को बचाया जिसने बाद में राजा युधिष्ठिर के लिए दिव्य सभाभवन बनाया। अर्जुन के साथ सैनिकों से घिरे भगवान् ने अपने रथ पर सवारी करने के अवसर का भी लाभ उठाया।
Desiring to please King Yudhishthira, the Lord stayed at Indraprastha for several months. During His stay, He and Arjuna pleased Agnideva by offering him the Khandava forest. They saved the demon Maya, who later built a divine assembly hall for King Yudhishthira. The Lord also took advantage of the opportunity to ride on His chariot surrounded by soldiers with Arjuna.
तात्पर्य
श्रील प्रभुपाद ने कृष्ण में लिखा है: "इसी समय के दौरान भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन की मदद से अग्नि-देव अग्नि को खुश करने के लिए खुंडवा वन को भस्म करने की अनुमति दी। वन में आग लगने के दौरान, कृष्ण ने दानव मायासुर को बचाया, जो जंगल में छिपा हुआ था। बचाए जाने पर, मायासुर पांडवों और भगवान कृष्ण के प्रति कृतज्ञ महसूस करने लगा, और उसने हस्तिनापुर शहर में एक अद्भुत सभा भवन का निर्माण किया। इस तरह, भगवान कृष्ण, राजा युधिष्ठिर को प्रसन्न करने के लिए, हस्तिनापुर शहर में कई महीनों तक रहे। अपने प्रवास के दौरान, उन्होंने इधर-उधर टहलने का आनंद लिया। वह अर्जुन के साथ रथों पर गाड़ी चलाते थे, और कई योद्धा और सैनिक उनका अनुसरण करते थे।"
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दस के अंतर्गत इकहत्तर अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥