हे शक्तिशाली देवता, दिग्विजय करनेवाला ही राजसूय यज्ञ कर सकता है। मेरे मतानुसार, जरासंध पर विजय प्राप्त करने से दोनों ही उद्देश्य पूरे हो सकेंगे।
O almighty Vibhu, only he who has conquered the Digvijaya can perform the Rajasuya Yagna. In this way, in my opinion, both the objectives will be fulfilled by conquering Jarasandha.
तात्पर्य
श्री उद्धव ने यहाँ यह समझाया कि केवल वही, जिसने समस्त दिशाओं को जीता है, राजसूय यज्ञ करने का हकदार है। इसलिए भगवान कृष्ण को तुरंत यज्ञ में भाग लेने के निमंत्रण को स्वीकार करना चाहिए, लेकिन फिर उन्हें जरासंध को मारने की व्यवस्था एक आवश्यक शर्त के रूप में करनी चाहिए। इस तरह राजाओं का सुरक्षा का अनुरोध स्वतः ही पूरा हो जाएगा। यदि भगवान इस एकल नीति का पालन करेंगे - जैसे कि यह देखना कि राजसूय यज्ञ विधिवत सम्पन्न होता है - तो सभी उद्देश्य पूरे हो जाएँगे। ध्रुवल रूग गोस्वामी के अनुसार अपने भक्ति रसामृत सिंधु में, भगवान कृष्ण के गुणों में से एक है 'चतुर', जिसका अर्थ है कि वह एक ही समय में विभिन्न प्रकार के कार्य कर सकते हैं। इस प्रकार भगवान निश्चित रूप से इस दुविधा को सुलझा सकते थे कि कैसे राजा युधिष्ठिर की राजसूय यज्ञ करने की इच्छा और कैद राजाओं की स्वतंत्रता की इच्छा को एक साथ पूरा किया जाए। लेकिन कृष्ण अपने प्रिय भक्त उद्धव को समाधान का श्रेय देना चाहते थे और इस तरह उन्होंने वि perplexed होने का नाटक किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥