वैदिक स्तुतियों की ऊँची ध्वनि के साथ-साथ गीत तथा संगीत-वाद्य बज उठे और राजा बहुत अधिक सम्मान के साथ भगवान् हृषीकेश से मिलने के लिए आगे बढ़े, ठीक उसी तरह जैसे इन्द्रियाँ प्राणों से मिलने के लिए जाती हैं।
The loud sound of Vedic hymns, songs and musical instruments resounded, and the King advanced reverently to meet Lord Hrishikesa, just as the senses advance to meet the soul.
तात्पर्य
भगवान श्री कृष्ण को यहाँ हृषीकेश, इन्द्रियों का स्वामी रूप में वर्णित किया गया है और राजा युधिष्ठिर का भगवान के पास दौड़कर आना इन्द्रियों के जीवन-चेतना से उत्सुकता से जुड़ने से तुलना की गई है। चेतना के बिना इन्द्रियाँ बेकार हैं, वास्तव में इन्द्रियाँ चेतना द्वारा कार्य करती हैं। इसी तरह, जब व्यक्तिगत आत्माएँ कृष्ण चेतना, भगवान के प्रेम से वंचित होती हैं, तो वे भौतिक अस्तित्व नामक एक बेकार और भ्रामक संघर्ष में प्रवेश कर जाती हैं। राजा युधिष्ठिर जैसे शुद्ध भक्त कभी भी भगवान के संग से वंचित नहीं होते हैं, क्योंकि वे उन्हें हमेशा अपने हृदय में रखते हैं, और फिर भी वे विशेष आनंद का अनुभव करते हैं, जब वे लंबे अलगाव के बाद भगवान को देखते हैं, जैसा कि यहाँ वर्णित है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥