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bhagavat 10.71.18: यदुओं के राजा श्रीकृष्ण ने सम्मानित करके, नारद मुनि ने भगवान को नमस्कार किया। भगवान श्री कृष्ण से मिलने से नारद की सभी इन्द्रियाँ प्रसन्न थीं। इस प्रकार भगवान के निर्णय को सुनकर और पूजा लेकर, उन्हें अपने दिल में मज़बूती से रखते हुए, नारद आकाश से होकर चले गए।   |   bhagavat अध्याय 10.71: भगवान् की इन्द्रप्रस्थ यात्रा   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 71: भगवान् की इन्द्रप्रस्थ यात्रा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  10.71.18 
अथो मुनिर्यदुपतिना सभाजित:
प्रणम्य तं हृदि विदधद् विहायसा ।
निशम्य तद्व्‍यवसितमाहृतार्हणो
मुकुन्दसन्दरशननिर्वृतेन्द्रिय: ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
यदुओं के राजा श्रीकृष्ण ने सम्मानित करके, नारद मुनि ने भगवान को नमस्कार किया। भगवान श्री कृष्ण से मिलने से नारद की सभी इन्द्रियाँ प्रसन्न थीं। इस प्रकार भगवान के निर्णय को सुनकर और पूजा लेकर, उन्हें अपने दिल में मज़बूती से रखते हुए, नारद आकाश से होकर चले गए।
 
Honored by Sri Krishna, the chief of the Yadus, the sage Narada offered his obeisances unto the Lord. Having met Lord Krishna, all the senses of Narada were satisfied. Thus, having heard the Lord's decision and having accepted His worship, having firmly imbibed Him in his heart, Narada departed through the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)