विप्रा मन्त्रविदो युक्तास्तैर्या: प्रोक्तास्तथाशिष: ।
ता निष्फला भविष्यन्ति न कदाचिदपि स्फुटम् ॥ १७ ॥
अनुवाद
ब्राह्मण जो वैदिक मंत्रों का उच्चारण करने में पूर्ण अधिकार रखते थे, योगशक्ति से पूर्ण योगी थे। उनके द्वारा दिया गया आशीर्वाद कभी निष्फल नहीं होता था।
The Brahmins, who were fully adept in reciting Vedic mantras, were Yogis endowed with yogic powers. Whatever blessings they gave never went in vain.
तात्पर्य
ब्राह्मण जाति के गुणों से पूर्ण रूप से संपन्न ब्राह्मण हमेशा रहस्यमयी योग में पूर्ण शक्तिशाली योगी होते हैं। उनके वचन कभी असफल नहीं होते। समाज के अन्य सदस्यों के साथ हर लेन-देन में, निश्चित रूप से ब्राह्मणों पर निर्भर किया जा सकता है। हालाँकि, इस युग में, यह ध्यान में रखना चाहिए कि ब्राह्मण अपने गुणों में अनिश्चित हैं। क्योंकि कोई यज्ञिक ब्राह्मण नहीं हैं, सभी यज्ञ निषिद्ध हैं। इस युग में केवल अनुशंसित यज्ञ संकीर्तन यज्ञ है। यज्ञैः संकीर्तन-प्रायैर् यजन्ति हि सुमेधसः (भागवत 11.5.32)। यज्ञ का अर्थ विष्णु को संतुष्ट करना है (यज्ञार्थान् कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्म-बन्धनः)। क्योंकि इस युग में कोई योग्य ब्राह्मण नहीं हैं, इसलिए लोगों को हरे कृष्ण मंत्र का जाप करके यज्ञ करना चाहिए (यज्ञैः संकीर्तन-प्रायैर् यजन्ति हि सुमेधसः)। जीवन यज्ञ के लिए है, और हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे/हरे रामा, हरे रामा, रामा रामा, हरे हरे के जप द्वारा यज्ञ किया जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥