श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 69: नारद मुनि द्वारा द्वारका में भगवान्  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  10.69.31 
कुर्वन्तं विग्रहं कैश्चित् सन्धिं चान्यत्र केशवम् ।
कुत्रापि सह रामेण चिन्तयन्तं सतां शिवम् ॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
एक स्थान पर वे अपने कुछ सलाहकारों के साथ विचार-विमर्श करके युद्धों की योजना बना रहे थे, और दूसरे स्थान पर वे शांति स्थापित कर रहे थे। कहीं पर केशव और बलराम मिलकर पवित्र लोगों के कल्याण के विषय में विचार कर रहे थे।
 
At one place he was planning wars in consultation with some of his advisors and at another place he was establishing peace. At some place Kesava and Balarama were together thinking about the welfare of holy people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)