श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 69: नारद मुनि द्वारा द्वारका में भगवान्  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  10.69.18 
द‍ृष्टं तवाङ्‍‍घ्रियुगलं जनतापवर्गं
ब्रह्मादिभिर्हृदि विचिन्त्यमगाधबोधै: ।
संसारकूपपतितोत्तरणावलम्बं
ध्यायंश्चराम्यनुगृहाण यथा स्मृति: स्यात् ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
अब मैंने आपके उन चरणों के दर्शन किये हैं, जिनके दर्शन से आपके भक्तों को मोक्ष प्राप्त होता है, जिन चरणों पर ब्रह्माजी और अन्य महान विभूतियाँ अपने हृदय में ध्यान करके ही संतुष्ट होती हैं और जो भवसागर में गिर चुके हैं वे उद्धार पाने के लिए आपके चरणों का ही स्मरण करते हैं। कृपया आप मुझ पर भी अपनी कृपा करें ताकि मैं हर समय विचरण करते हुए आपका स्मरण कर सकूँ। कृपा करके मुझे यह शक्ति प्रदान करें कि मैं आपका स्मरण कर सकूँ।
 
Now I have seen those feet of yours which give salvation to your devotees and which even Brahma and other great men of infinite wisdom can only meditate upon in their hearts but which those who have fallen into the pit of existence take refuge in for salvation. Be kind to me so that I may remember you constantly while walking. Kindly give me strength to remember you.
तात्पर्य
भगवान कृष्ण ने नारद मुनि से पूछा, "हम तुम्हारे लिए क्या कर सकते हैं?" और यहाँ नारद ने उत्तर दिया। नारद मुनि भगवान कृष्ण के एक शुद्ध भक्त हैं, और इस प्रकार उनका अनुरोध अतिउत्कृष्ट है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)