Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.69.14: भगवान धर्म के सबसे बड़े रक्षक हैं। इसकारण जब उन्होंने नारद को देखा तभी तुरंत श्री देवी के पलंग से उठ खड़े हुए, नारद के चरणों पर मुकुट युक्त मस्तक को झुकाया और हाथ जोड़कर मुनि को अपने आसन पर बैठाया। | bhagavat अध्याय 10.69: नारद मुनि द्वारा द्वारका में भगवान् । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तं सन्निरीक्ष्य भगवान् सहसोत्थितश्री-
पर्यङ्कत: सकलधर्मभृतां वरिष्ठ: ।
आनम्य पादयुगलं शिरसा किरीट-
जुष्टेन साञ्जलिरवीविशदासने स्वे ॥ १४ ॥
अनुवाद
भगवान धर्म के सबसे बड़े रक्षक हैं। इसकारण जब उन्होंने नारद को देखा तभी तुरंत श्री देवी के पलंग से उठ खड़े हुए, नारद के चरणों पर मुकुट युक्त मस्तक को झुकाया और हाथ जोड़कर मुनि को अपने आसन पर बैठाया।
The Lord is the greatest upholder of Dharma. Therefore, when He saw Narada, He immediately got up from Shri Devi's bed, bowed His crowned head at Narada's feet and with folded hands made the sage sit on His seat.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥