Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.67.8: एक बार की बात है, जब द्विविद पड़ोसी राज्यों को सताने और कुलीन कुल की महिलाओं को अपवित्र करने में जुटा हुआ था, तो उसने रैवतक पर्वत से एक बहुत ही मधुर गायन की आवाज सुनी। तो वह वहाँ चला गया। | bhagavat अध्याय 10.67: बलराम द्वारा द्विविद वानर का वध । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं देशान् विप्रकुर्वन् दूषयंश्च कुलस्त्रिय: ।
श्रुत्वा सुललितं गीतं गिरिं रैवतकं ययौ ॥ ८ ॥
अनुवाद
एक बार की बात है, जब द्विविद पड़ोसी राज्यों को सताने और कुलीन कुल की महिलाओं को अपवित्र करने में जुटा हुआ था, तो उसने रैवतक पर्वत से एक बहुत ही मधुर गायन की आवाज सुनी। तो वह वहाँ चला गया।
Once when Dvivida was thus engaged in harassing the neighbouring kingdoms and debauching the women of the noble families, he heard the sound of very sweet singing coming from the Raivataka mountain. So he reached there.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥