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bhagavat 10.67.7: जैसे भिड़-कीट छोटे-छोटे कीड़ों को कैद बना लेता है, वैसे ही उसने ढिठाई से स्त्री और पुरुषों को पर्वत की घाटी में गुफ़ाओं के भीतर बंद कर दिया और उन गुफ़ाओं को बड़े-बड़े पत्थरों से बंद कर दिया।   |   bhagavat अध्याय 10.67: बलराम द्वारा द्विविद वानर का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 67: बलराम द्वारा द्विविद वानर का वध  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  10.67.7 
पुरुषान् योषितो द‍ृप्त: क्ष्माभृद्‍द्रोणीगुहासु स: ।
निक्षिप्य चाप्यधाच्छैलै: पेशष्कारीव कीटकम् ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
जैसे भिड़-कीट छोटे-छोटे कीड़ों को कैद बना लेता है, वैसे ही उसने ढिठाई से स्त्री और पुरुषों को पर्वत की घाटी में गुफ़ाओं के भीतर बंद कर दिया और उन गुफ़ाओं को बड़े-बड़े पत्थरों से बंद कर दिया।
 
Just like a wasp imprisons small insects, in the same way he impudently imprisoned the men and women in caves in the valley of the mountain and closed these caves with huge rocks.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)