श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 67: बलराम द्वारा द्विविद वानर का वध  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  10.67.4 
क्व‍‍चित्स शैलानुत्पाट्य तैर्देशान् समचूर्णयत् ।
आनर्तान् सुतरामेव यत्रास्ते मित्रहा हरि: ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
एक दिन द्विविद ने बहुत सारे पहाड़ों को उखाड़ लिया और उनके द्वारा आस-पास के सभी राज्यों को तबाह कर दिया, खासकर आनर्त प्रांत को, जहाँ उसके दोस्त को मारने वाले भगवान हरि रहते थे।
 
Once Dvivida uprooted a number of mountains and used them to destroy all the neighbouring kingdoms, especially the region of Anarta where the killer of his friend, Lord Hari, lived.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)