| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ » अध्याय 67: बलराम द्वारा द्विविद वानर का वध » श्लोक 26 |
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| | | | श्लोक 10.67.26  | चकम्पे तेन पतता सटङ्क: सवनस्पति: ।
पर्वत: कुरुशार्दूल वायुना नौरिवाम्भसि ॥ २६ ॥ | | | | | | अनुवाद | | हे कुरुवंश के शेर, जब वो गिरा, रैवतक पर्वत अपने शिखरों और वृक्षों समेत हिल गया, मानो समुद्र में हवाओं के झोंकों से हिलती हुई एक नाव हो। | | | | हे कुरुवंश के शेर, जब वो गिरा, रैवतक पर्वत अपने शिखरों और वृक्षों समेत हिल गया, मानो समुद्र में हवाओं के झोंकों से हिलती हुई एक नाव हो। | | ✨ ai-generated | | |
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